From Principal’s Desk

“Let noble thoughts come to us from every side”
– Rigveda

Progressiveness and permutation are the basic elements of any society. Change always challenges the norms set by society. Education is the criterion on the basis of which the progress of any society can be assessed in its totality. The era through which human civilization is passing today is not only unseen but also unprecedented. We have a moral responsibility to preserve and transfer our values and culture on one hand and on the other hand innovation, research and use of technology have become indispensable for the upliftment and development of mankind. As educationists, it is our responsibility to prepare the framework of value-based, quality education while designing the curriculum for school education. Education along with being the carrier of our culture, is a combination of modern understanding and technology in equal proportion. Education does not drown our students away in the flood of information, but by assimilating it, they can develop their personality all-round and can prove to be a better resource while discharging their duties towards society and nation. Keeping these points in mind, India has changed its education policy after almost three decades. Like any other policy, the success of the New Education Policy 2020 will also depend on its implementation. That is why keeping in mind the objectives of the new education policy, we have started some new initiatives in our school which include – Pragyan, Lakshya, Ehsaas, APS, Under the Sky, and Lessons of Equality, etc. The purpose of all these programs is to provide the students ‘Education of life’ beyond bookish knowledge.

Today we need a radical change in the field of education. The more the change is accompanied by multilateral cooperation, the more eternal and effective it will be. Being a responsible educational institution, we look forward to your cooperation in this endeavor. Come and be a part of the change…
Stay Blessed.

“आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वतः”
– ऋग्वेद

प्रगतिशीलता एवं परिवर्तन किसी भी समाज का आधारभूत गुण है। परिवर्तन सदैव ही समाज के बने-बनाए मानदण्डों को चुनौती देता है। शिक्षा वह मानदण्ड है जिसके आधार पर किसी भी समाज की प्रगति का समग्रता में मूल्यांकन किया जा सकता है। आज मानव सभ्यता जिस दौर से गुजर रही है वहाँ चुनौतियाँ अनदेखी तो हैं ही अभूतपूर्व भी हैं। हमारे सामने एक तरफ़ अपने मूल्यों एवं संस्कृति के संरक्षण और हस्तांतरण की नैतिक ज़िम्मेदारी है तो दूसरी तरफ़ नवाचार, शोध और तकनीक का प्रयोग मानव जाति के उत्थान और विकास के लिए अपरिहार्य हो चुका है। शिक्षाविद होने के नाते हमारा दायित्व बनता है कि हम स्कूली शिक्षा के लिए पाठ्यचर्या तैयार करते समय मूल्य आधारित, गुणवत्ता युक्त शिक्षा की रूपरेखा तैयार करें। ऐसी शिक्षा जो हमारी संस्कृति की संवाहक होने के साथ-साथ आधुनिक बोध और तकनीक का समानुपात में संयोजन हो। शिक्षा जो हमारे विद्यार्थियों को सूचना की बाढ़ में बहा ना ले जाए अपितु उसे आत्मसात् करते हुए वे अपने व्यक्तित्व का चहुँमुखी विकास कर सके और समाज एवं राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए एक बेहतर संसाधन साबित हो सकें। इन्हीं बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए भारत ने लगभग तीन दशकों पश्चात अपनी शिक्षा नीति में बदलाव किया है। अन्य किसी भी नीति की तरह ही नई शिक्षा नीति- 2020 की सफलता भी इसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। इसलिए हमने नई शिक्षा नीति के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए अपने विद्यालय में कुछ नए कार्यक्रमों की शुरुआत की है जिनमें – प्रज्ञान, लक्ष्य, एहसास, ए.पी.एस., अंडर द स्काई , लैसन्स ऑफ इक्वेलिटी इत्यादि शामिल हैं। इन सबका प्रयोजन विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान से इतर जीवन की शिक्षा प्रदान करना है।

आज हमें शिक्षा के क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव की ज़रूरत है। बदलाव जितना बहुपक्षीय सहयोग के साथ होगा उतना ही शाश्वत और प्रभावशाली होगा। एक ज़िम्मेदार शैक्षणिक संस्थान होने के नाते हमारा यह प्रयास आपके सहयोग का आकांक्षी है। आइए और बदलाव का हिस्सा बनिए…….अस्तु।

Principal